Pradip Machhi

Latest Hindi Shayari SMS: All Types Sher O Shayaris

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Latest Hindi Shayari SMS: All Types Sher O Shayaris




1)   याद तुम आते रहे,इक हूक सी उठती रही नींद मुझसे,में नींद से,भागती छुपती रही रातभर बैरन निगोड़ी       चांदनी चुभती रही शबनम गिरती रही,आग सी जलती रही

2)   कितना भी हल्दी,चंदन,शहद लगा लूँ ,
      दीदार-ए-यार के बिना निखार रुख़ से रुखसत ही रहता है

3)   सच है ख्वाहिशों की कोई हद्द नही होती मेरी ही ख्वाहिशों को देखो . . .
     तुम तुम और बस तुम . . .

4)   ये मोह मोह के धागे..
      तेरी उंगलियो से जा उलझे
      कोई रोह टोह ना लागे..
      किस तरह ये गिरह सुलझे

5)  Make a perfect relation which never ends and make life happy.

6)  जब से देखा ह तेरी आखो मे झाक कर आईना अच्छा नही लगता
     मोहब्बत मे ऐसे हुए ह दीवाने तुम्हें कोई देखे,तो अच्छा नहीं लगता

7)  वो लिखते है हमारा नाम मिट्टी में और मिटा देते है
     उनका ये अलग प्यार का अंदाज़ है, पर हमें तो वो मिट्टी में मिला देते है

8)  दिल बहल जाता है आपके आ जाने से।
     मेरी रूह महक जाती है आपकी मधुर सांसों से।।

9)  जी लो हर लम्हा,* *बीत जाने से पहले..
     * *लौट कर यादें आती है,* *वक़्त नहीं*

10)  जिस्म की दरारों से रूह नजर आने लगी,
       बहुत अन्दर तक तोड़ गया है मुझे; इश्क तेरा..!

11)  कुछ तुम कोरे कोरे से,कुछ हम सादे सादे से, एक आसमां पर जैसे,
       दो चाँद आधे आधे से.

12)  ये ज़िन्दगी जो मुझे कर्ज़दार करती रही
       कभी अकेले में मिले तो हिसाब करूँ

13)  Love is old,
       Love is new,
       Love is all..❤

14) रेशमी जुल्फें हैं,
      मखमली है चेहरा तुम्हारा या तो बना लूँ
      तुम्हे अपना,
       या बन जॉउ तुम्हारा


15)  लफ़्ज़ों में बयाँ करूँ
       जो तुम्हे इक लफ्ज़ मुहब्बत ही काफी है.

16)  बेताबी-ओ-सुकून की हुईं मंज़िलें तमाम,
       बहलाएं तुझ से छूट के तबियत कहाँ - कहाँ ???

17)  मोहब्बत होनी थी सो हो गई....!!
       जनाब अब नसीहतें छोड़िये ,बस दुआ कीजिये....!!

18)  हर रोज बहक जाते हैं मेरे कदम, तेरे पास आने के लिये!
       ना जाने कितने फासले तय करने अभी बाकी है तुमको पाने के लिये..!

19)  जरूरी नहीं है की हर बात पर तुम मेरा कहा मानो,
       दहलीज पर रख दी है चाहत और अब आगे तुम जानो !!

20)  कभी गुजरती थी जिंदगी धीरे धीरे, कभी साइकिल पे,
       कभी पैदल, इक बचपन क्या गुजरा जिंदगी को जैसे पर लग गये।।

Pradip Machhi

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